दूरस्थ शिक्षा

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दूरस्थ  शिक्षा, अथवा दूरस्थ माध्यम से  शिक्षण शिक्षा का ऐसा क्षेत्र है जो शिक्षा-शास्त्र तथा अध्यापन, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक प्रणाली डिजाइन पर ध्यान केन्द्रित करता है जिसका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करना है, जो 'स्थल पर' शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं।

विहंगावलोकन

दूरस्थ शिक्षा "शिक्षण तक पहुंच सृजित करने अथवा उपलब्ध कराने की ऐसी प्रक्रिया है जब सूचना का स्रोत तथा शिक्षार्थी समय और दूरी, अथवा दोनों ही मायनों में एक-दूसरे से अलग होते हैं, दूसरे शब्दों में, दूरस्थ शिक्षण शिक्षार्थियों के लिए समान रूप से गुणवत्तापूर्ण मूल्य का ऐसा शैक्षणिक अनुभव सृजित करने की प्रक्रिया है जो कक्षा के बाहर उनकी आवश्यकताओं के श्रेष्ठतम अनुकूल है।

दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रम जिनमें किसी कारण से, जिसमें परीक्षा लिया जाना भी शामिल है, भौतिक स्थलीय उपस्थिति की आवश्यकता होती है, मिश्रित अनुसंधान एवं विकास अथवा अध्ययन का सम्मिश्रित पाठ्यक्रम माना जाता है।

यह उभरती हुई प्रौद्योगिकी समूचे विश्व में विश्वविद्यालयों और संस्थाओं में व्यापक रूप से प्रयोग में लाई जा रही है। प्रौद्योगिकीय प्रगति की हालिया प्रवृत्तियों के साथ, दूरस्थ शिक्षण व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिए जाने तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छात्रों के साथ संप्रेषण की अपनी क्षमता के लिए अधिक मान्यता प्राप्त कर रहा है।

http://www.ugc.ac.in/deb/

अभातशिप की नीति

  • अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (अभातशिप) को संसद द्वारा समूचे देश में तकनीकी शिक्षा प्रणाली की समुचित आयोजना करने तथा उसका समन्वित विकास करने के लिए अधिदेशित किया गया है। यह तकनीकी शिक्षा प्रणाली में सन्नियमों और मानकों के संवर्धन, गुणवत्तापूर्ण संवर्धन तथा समुचित अनुरक्षण के लिए तथा उससे संबंधित मामलों के लिए उत्तरदायी है।
  • जैसा कि अभातशिप अधिनियम, 1987 के अंतर्गत परिभाषित किया गया है, 'तकनीकी शिक्षा' में शामिल है इंजीनियरी, प्रौद्योगिकी, वास्तुकला, नगर आयोजना, प्रबंधन , भेषजी और अनुप्रयुक्त कला एवं शिल्प में शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण के कार्यक्रम।
  • वर्तमान में, देश की तकनीकी शिक्षा प्रणाली शिक्षा की पारंपरिक रूबरू प्रणाली के माध्यम से तकनीकी शिक्षा के कार्यक्रम संचाति करती है।
  • वर्तमान में, अभातशिप भी एक मिश्रित मॉडल अथवा एक सम्मिश्रित मॉडल के माध्यम से तकनीकी शिक्षा को अनुमति प्रदान करता है।
  • मिश्रित शिक्षण रीति( मोड )के माध्यम से प्रदान की जाने वाली तकनीकी शिक्षा के मानकों के अनुरक्षण के दो पहलू हैं। एक वितरण तंत्र है जिसमें पाठ्यक्रम/कार्यक्रम शामिल हैं (मिश्रित शिक्षण रीति (मोड) के माध्यम से) तथा दूसरा पाठ्यक्रम की विषय-वस्तु की गुणवत्ता और प्रासंगिकता है।
  • अभातशिप ने मिश्रित शिक्षण रीति (मोड )के माध्यम से तकनीकी शिक्षा के संचालन के लिए प्रक्रियाओं और विनियमों को परिभाषित किया है
  • मिश्रित शिक्षण मोड के लिए अनुमोदन प्रक्रिया पुस्तिका

आभासी (वर्चुअल) प्रयोगशालाएं

भारत को यथासंभव अल्पावधि के भीतर विश्व में एक ज्ञानवान महाशक्ति के रूप में उभरने के लिए यह अनिवार्य है कि हम अपनी कार्यशील जनसंख्या को ज्ञानवान अथवा ज्ञान'समर्थ कार्यशील जनसंख्या में अंतरित और प्रशिक्षित करते हुए हमारे जनसांख्यिकीय लाभ को ज्ञान के महास्रोत में परिवर्तित करें। मानव संसाधन विकास निश्चित तौर पर इस अपेक्षा को पूरा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

मिशन के उद्देश्य

इस मिशन का मुख्य भाग भाग 50 करोड़ से अधिक भारतीयों (कार्यशील जनसंख्या) की शिक्षण आवश्यकताओं की पूर्ति करने तथा शिक्षण समुदाय की सभी अपेक्षाओं के लिए एक स्थान पर समस्त समाधान उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण अपनाना है। विश्व में प्रतिस्पर्धात्मक पकड़ हासिल करने तथा उसे बनाए रखने के लिए हमें प्रतिभा तथा आजीवन शिक्षण की पहचान करने और उसे संपोषित करने के प्रयोजनार्थ एक प्रणाली की आवश्यकता है।

शिक्षार्थी की वैयक्तिक आवश्यकताओं पर आधारित ज्ञान मॉड्यूलों को उन्हें उचित समय पर वितरित किए जाने की आवश्यकता होगी जिसमें उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति करने के लिए समुचित विषय-वस्तु शामिल हो। आने वाले समय में, प्रत्येक वैयक्तिक शिक्षार्थी/कर्मकार के ज्ञान और योग्यता प्रोफाइल को विकसित और अनुरक्षित करने की आवश्यकता होगी। ऐसी प्रणाली समय के साथ-साथ किफायती तरीके से विकसित की जाएगी जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित उद्देश्यों को भी एकीकृत किया जाएगा :-

  • अवसरों की तलाश करने तथा अपेक्षा के उपयुक्त ज्ञान की अपेक्षित मदों का पता लगाने के लिए समय व्यर्थ किए जाने को न्यूनतम करना और बौद्धिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग करना।
  • पारंपरिक अथवा अपारंपरिक क्षेत्रों में औपचारिक अथवा गैर-औपचारिक तरीकों से अर्जित किसी स्तर पर किसी प्रकार की प्राप्ति को प्रमाणित करना।
  • स्वत: शिक्षण के लिए सभी के लिए बोध के उपयुक्त स्तरों पर अपेक्षित ज्ञान की किसी भी समय उपलब्धता
  • विचारों और तकनीकों की साझेदारी के लिए प्लेटफार्म तथा ज्ञान संसाधनों की पूलिंग
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